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Students of classes from 1st to 5th, which were closed since March 22, came again to school today, happiness on someone’s face and some upset | 22 मार्च से बंद हुए पहली से पांचवीं तक के स्टूडेंट्स आज फिर आये स्कूल, किसी के चेहरे पर खुशी तो कोई परेशान

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बीकानेर35 मिनट पहले

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नोखा के एक निजी स्कूल में नन्ह� - Dainik Bhaskar

नोखा के एक निजी स्कूल में नन्ह�

कोरोना के चलते राजस्थान में पहली बार 22 मार्च 2020 को लॉकडाउन लगा। स्कूलों में छुटि्टयां कर दी गई, उम्मीद थी कि पंद्रह दिन बाद फिर सब पहले जैसा सामान्य हो जायेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पहली व दूसरी लहर के बाद बंद हुए स्कूलों में छठी से बारहवीं तक के स्टूडेंट्स तो फिर भी कुछ दिन स्कूल आये लेकिन करीब साढ़े पांच सौ दिन से पहली से पांचवीं के स्टूडेंट पहली बार आज स्कूल पहुंचे। उपस्थिति उम्मीद से बहुत कम रही।

सीधे तीसरी क्लास में स्कूल आये

राज्य में करीब 55 लाख स्टूडेंट्स एक बार फिर स्कूल पहुंच रहे हैं। इनमें करीब 26 लाख स्टूडेंट्स तो सरकारी स्कूल में है जबकि शेष प्राइवेट स्कूल में पढ़ रहे हैं। जिन स्टूडेंट्स ने वर्ष 2020 में पहली क्लास में एडमिशन लिया था, उनके अप्रेल 20 में फाइनल एग्जाम होने थे, लेकिन कोरोना के कारण उन्हें प्रमोट किया गया। फिर सेकंड क्लास में भी प्रमोट किया गया। ये बच्चे सीधे थर्ड क्लास में आये हैं। इसी तरह वर्ष 2020 में स्कूल में एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स सीधे सैकंड क्लास में ही स्कूल आये हैं।

गार्जन कोई परेशान कोई खुश

पहली से पांचवीं तक के स्टूडेंट्स की उम्र चार से दस साल के बीच होने के कारण कई गार्जन स्कूल खुलने से परेशान भी है। ऐसे गार्जन का मानना है कि अभी कोरोना पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में वो अभी स्कूल भेजने के लिए तैयार नहीं है। बीकानेर के उमाकांत व्यास का कहना है कि मैं अभी स्कूल नहीं भेज रहा। बच्चों की वैक्सीन आने तक स्कूल खोलने ही नहीं चाहिए थे। इसी तरह अमित थानवी का कहना है कि स्कूल तो खुल रहे हैं लेकिन मैं अभी नहीं भेजूंगा। सब कुछ सामान्य होने पर ही भेजना शुरू करुंगा। वहीं दूसरी ओर बृजमोहन का कहना है कि अब तो स्कूल खुलना ही चाहिए था। कोरोना बच्चों में नहीं होता। बृजमोहन के दो बच्चे आज से फिर स्कूल जायेंगे।

शुरूआती दिनों में दबाव नहीं

स्कूल संचालकों का कहा है कि शुरूआती दिनों में बच्चों को पढ़ाई के दबाव में नहीं लायेंगे। जैन पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल सीमा जैन का कहना है कि हम अपने स्टूडेंट्स के साथ घर जैसा माहौल रखेंगे, ताकि लंबे अर्से बाद स्कूल में उनका मन लग जाये। स्कूल में खेलकूद एक्टिविटी को बढ़ावा देंगे। साथ में पढ़ाई करायेंगे। इसी तरह ल्याल पब्लिक स्कूल की संचालक अंजू पोपली का कहना है कि छोटे स्टूडेंट्स के लिए हमने नयी व्यवस्था की है। पढ़ाई के साथ उन्हें अच्छा माहौल दिया जायेगा। सरकारी स्कूलों में भी बच्चों का पहले दिन बकायदा स्वागत किया गया। मुरलीधर व्यास कॉलोनी में स्थित सरकारी स्कूल में बच्चों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया।

पहले स्केनिंग, फिर प्रवेश

अधिकांश स्कूल्स में बच्चों को अंदर जाने से पहले स्केनिंग प्रोसेस से गुजरना पड़ा। बच्चों के शरीर का तापमान चैक किया गया। उनके मास्क सही किया गया। हर बच्चे को हैंड वॉश की सलाह दी गई। नोखा के ओम इंग्लिश स्कूल में बच्चों ने बड़े अनुशासन के साथ इस प्रोसेस में हिस्सा लिया।

सरकारी स्कूल में ब्रिज कोर्स

दो साल के अंतर से स्कूल आ रहे राजस्थान के स्टूडेंट्स को इस बार वर्कबुक देकर ब्रिज कोर्स करवाया जायेगा। सरकारी स्कूल में ये बुक फ्री दी जा रही है। शिक्षा विभाग ने प्राइवेट स्कूल के लिए साइट पर ये बुक उपलब्ध करवा दी है।

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