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Fatehabad Haryana: Ratia businessman fetched rice from UP-Bihar, farmers stopped trucks, administration kept silence, staged at market committee office | रतिया के कारोबारी ने यूपी-बिहार से मंगवाया चावल, किसानों ने ट्रक रोके, प्रशासन ने साधी चुप्पी, मार्केट कमेटी के दफ्तर पर धरना

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फतेहाबाद16 मिनट पहले

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  • हो-हल्ले के बीच पुलिस, मार्केट कमेटी और सेल्स टैक्स किसी भी विभाग ने न तो कोई कार्रवाई की, सभी ने अधिकार क्षेत्र का रोना रोया
  • किसानों के धरने और मीडिया के हस्तक्षेप के बाद झाड़ा अफसरों ने पल्ला, कहा-मामले की जांच करवाई जा रही है

फतेहाबाद के रतिया में शनिवार को उस वक्त माहौल गर्मा गया, जब किसानों ने चावलों से भरे ट्रकों को रोक लिया। पता चला कि यूपी-बिहार से लाया गया यह चावल रतिया के एक कारोबारी ने मंगवाया था। गजब की बात है कि इस हो-हल्ले के बीच पुलिस, मार्केट कमेटी और सेल्स टैक्स किसी भी विभाग ने न तो कोई कार्रवाई की और न ही इस बारे में कुछ बोलने को कोई अधिकारी तैयार है। फिलहाल किसानों ने इस संबंध में शिकायत दी है, वहीं मार्केट कमेटी के दफ्तर के बाहर धरना शुरू कर दिया।

धरने पर बैठे किसानों ने बताया कि वो पहले भी प्रशासन को बता चुके हैं कि इलाके में बड़े पैमाने पर बाहरी राज्यों से चावल लाकर यहां के शैलरों में लगाया जा रहा है। इससे सरकार और किसान दोनों वर्गों को चूना लग रहा है, मगर प्रशासन कोई कार्रवाई करने को तैयार नहीं। इसी बीच शनिवार के फिर से 6 ट्रक चावल भरकर आए तो इनके बाहरी राज्यों से आए होने की आशंका के चलते इन्हें रोक लिया। जब ट्रक चालकों से पूछा तो पता चला कि यह चावल रतिया की किसी फर्म ने बिहार और यूपी से मंगवाया और इन्हें रतिया के ही किसी शैलर में लगाया जाना था। आशंका यकीन में बदली तो किसानों में रोष फैल गया।

प्रशासन के खिलाफ रोष प्रदर्शन करते बाहर से आए चावलके ट्रकों को पकड़ने वाले किसान।

प्रशासन के खिलाफ रोष प्रदर्शन करते बाहर से आए चावलके ट्रकों को पकड़ने वाले किसान।

आनन-फानन में सूचना के बाद पुलिस मौके पर आई, लेकिन यह मामला अधिकार क्षेत्र का नहीं होने के चलते मार्केट कमेटी सचिव को बुलाया गया। उन्होंने भी इस मामले को अपने अधिकार क्षेत्र का नहीं बताते हुए हाथ खड़े कर लिए। इसके बाद सेल्स टैक्स विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। गजब की बात है कि उन्होंने भी यह कहकर बात खत्म कर दी कि ट्रकों में भरे माल संबंधी कागजात दिखा दिए जाते हैं तो वो भी कुछ नहीं कर पाएंगे।

मामला चाहे जो भी हो, पर लोग जानना चाह रहे हैं कि ट्रकों में भरे हजारों क्विंटल चावल का मालिक कौन है और वह सामने क्यों नहीं आ रहा। अब जब किसानों ने मामला पकड़ने की कोशिश की तो शासन और प्रशासन का कोई अधिकारी या नुमाइंदा सामने नहीं आ रहा है। इस मामले में जिम्मेदार कौन सा विभाग है या किसी विभाग के अधिकारियों की जवाबदेही बनती है, यह भी मालूम नहीं। किसान नेताओं ने सीधे तौर पर इसमें प्रशासनिक अधिकारियों मिलीभगत का भी आरोप लगाया है। इसी के चलते वो धरने पर बैठ गए। हालांकि बाद में मीडिया के इस मसले में घुसने के चलते अधिकारियों ने यह कहकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की है कि मामले की जांच करवाई जा रही है। जो तथ्य सामने आएंगे, उन्हीं के हिसाब से आगे कुछ कहा जा सकेगा।

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