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Facebook’s attitude – Strict on common people, but exempts celebrities, politicians from the rules; Run ‘CrossCheck’ program to save high profile users | आम लोगों पर सख्ती, पर सेलेब्रिटी, नेताओं को नियमों से छूट देता है; हाई प्रोफाइल यूजर्स को बचाने ‘क्रॉस चेक’ प्रोग्राम चलाया

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सैन फ्रांसिस्को39 मिनट पहले

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वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अपनी एक रिपोर्ट में यह खुलासा किया है कि कंपनी ने कुछ यूजर्स को बचाने के लिए क्वालिटी कंट्रोल मैकेनिज्म कार्यक्रम शुरू किया है। - Dainik Bhaskar

वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अपनी एक रिपोर्ट में यह खुलासा किया है कि कंपनी ने कुछ यूजर्स को बचाने के लिए क्वालिटी कंट्रोल मैकेनिज्म कार्यक्रम शुरू किया है।

सोशल मीडिया दिग्गज फेसबुक के नियम आम लोगों के लिए अलग और वीआईपी यूजर्स के लिए अलग-अलग हैं। कंपनी से ये ‘सुविधा’ पाने वाले यूजर्स की संख्या 58 लाख से ज्यादा है। इनमें सेलेब्रिटी, राजनेता और हाई प्रोफाइल यूजर्स शामिल हैं। इन्हें कंपनी बिना निगरानी किसी भी तरह की पोस्ट करने पर खुली छूट देती है। जबकि आम लोगों पर सख्ती की जाती है।

ये खुलासा वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में किया गया है। कंपनी ने इन यूजर्स को बचाने के लिए क्वालिटी कंट्रोल मैकेनिज्म के तहत ‘क्रॉस चेक’ कार्यक्रम शुरू किया है। इसे ‘एक्सचेक’ के तौर पर भी जाना जाता है। इस रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रोग्राम के तहत लाखों यूजर ‘वाइट लिस्ट’ में रखे गए हैं। उन्हें कार्रवाई से सुरक्षा दी गई है, जबकि अन्य मामलों में विवादास्पद कंटेंट की समीक्षा ही नहीं की जाती।

‘वाइट लिस्ट’ में रखे गए खातों से ऐसी ऐसी सूचनाएं साझा की गई थीं, जैसे हिलेरी क्लिंटन ‘बाल यौन शोषण का गिरोह चलाती हैं’ या फिर तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका में शरण चाहने वाले लोगों को जानवर कहा था। रिपोर्ट में कुछ चर्चित लोगों द्वारा शेयर की गई पोस्ट का हवाला भी दिया है। इनमें फुटबॉल खिलाड़ी नेमार की एक पोस्ट है, जिसमें उन्होंने एक महिला की आपत्तिजनक तस्वीरें शेयर की थीं।

इस महिला ने नेमार पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। फेसबुक ने नेमार को बचाने के लिए यह पोस्ट हटा दी थी। फेसबुक कर्मचारियों के हवाले से बताया गया है कि कई बार वीआईपी कंटेंट हटाने के लिए कंपनी के सीईओ मार्क जकरबर्ग और सीओओ शेरिल सैंडबर्ग से मंजूरी लेनी पड़ती है।

ऐसी नीति को लेकर चिंता जता चुका है ओवरसाइट बोर्ड

फेसबुक पर क्या पोस्ट किया जाना चाहिए, इससे संबंधित विवादों को हल करने के लिए एक स्वतंत्र बोर्ड स्थापित किया गया है। फेसबुक ने बोर्ड को भरोसा दिला रखा है कि कंटेंट मॉडरेशन को लेकर दोहरी नीति नहीं अपनाई जाती। पर ताजा रिपोर्ट में किए गए दावों को देखने पर फेसबुक द्वारा दिलाया गया भरोसा गलत साबित होता है।

बोर्ड के प्रवक्ता जॉन टेलर के मुताबिक फेसबुक के कंटेंट मॉडरेशन की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी (खासकर मशहूर लोगों के खातों के बारे में कंपनी की नीति) को लेकर ओवरसाइट बोर्ड कई बार चिंता जता चुका है।

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