Press "Enter" to skip to content

China’s share in global bitcoin mining decreased – bitcoin consumes more electricity than the annual consumption of many countries, 0.5% of the world’s consumption is being done in this | कई देशों की सालाना खपत से ज्यादा बिजली खाती है बिटकॉइन, दुनिया की 0.5% खपत इसी में हो रही है

  • Hindi News
  • International
  • China’s Share In Global Bitcoin Mining Decreased Bitcoin Consumes More Electricity Than The Annual Consumption Of Many Countries, 0.5% Of The World’s Consumption Is Being Done In This

14 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक
डिजिटल करंसी बनाने में आम घर की 13 साल की खपत के बराबर लगती है बिजली। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar

डिजिटल करंसी बनाने में आम घर की 13 साल की खपत के बराबर लगती है बिजली। (फाइल फोटो)

क्रिप्टोकरंसी कुछ सालों में दुनिया में सबसे दिलचस्प, पर जटिल निवेश के रूप में उभरी हैं। क्रिप्टो समर्थकों का दावा है कि ये डॉलर, रुपए जैसी पारंपरिक मुद्राओं की जगह ले लेंगी। इन्हीं क्रिप्टोकरेंसी में सबसे लोकप्रिय नाम है बिटकॉइन का। अपनी शुरुआत से लेकर बिटकॉइन का मूल्य हजारों गुना बढ़ चुका है। लेकिन इसकी माइनिंग और लेनदेन में भारी मात्रा में बिजली खर्च होती है। कई देशों के सालाना बिजली खर्च से भी अधिक है।

बिटकॉइन के निर्माण से लेकर उसे खर्च करने और लेनदेन में सालाना 91 टेरावाट-घंटे की बिजली खर्च होती है। यह 55 लाख की आबादी वाले फिनलैंड के सालाना बिजली खर्च से कहीं ज्यादा है। बिटकॉइन का बिजली का खर्च दुनिया में इस्तेमाल बिजली का 0.5% है। 5 साल में बिटकॉइन माइनिंग और लेनदेन में बिजली खपत 10 गुना हुई। बिटकॉइन कोई देश होता तो बिजली खर्च के मामले में दुनिया के शीर्ष 40-50 देशों में शुमार होता।

क्या है माइनिंग?

बिटकॉइन डिजिटल मुद्रा है, जो कंप्यूटर से तैयार होती है। बिटकॉइन बनाने की इस प्रक्रिया को माइनिंग कहते हैं। कंप्यूटर पर बेहद जटिल समीकरणों की गणना के बाद एक बिटकॉइन बनती है। शुरुआत में घर पर रखे पीसी से बिटकॉइन माइनिंग हो सकती थी। अब जैसे-जैसे माइनिंग बढ़ रही है, इसकी प्रक्रिया भी जटिल हो रही है। यह एक तरह की गेमिंग और गेंबलिंग की तरह है। जितने ज्यादा कंप्यूटर और मशीनें इसमें शामिल होंगे, इसके समीकरणों को रखने के लिए भी बिजली लगती है।

बिटकॉइन की माइनिंग के मामले में चीन सबसे आगे

बिटकॉइन की माइनिंग की लिए अत्याधुनिक मशीनें व कूलिंग क्षमता की जरूरत है। इसी कारण इसकी माइनिंग विशाल डेटा सेंटरों में हो रही है, जिनकी मालिक बड़ी कंपनियां हैं। दुनिया में सिर्फ 7 माइनिंग समूह हैं जिनके पास पूरे नेटवर्क की 80% कंप्यूटिंग पावर है। दुनियाभर इसकी माइनिंग हो रही है। चीन इसमें सबसे आगे है, कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के मुताबिक ग्लोबल बिटकॉइन माइनिंग में चीन का हिस्सा 2019 के 75% से घटकर अब 46% बचा है।

खबरें और भी हैं…

Source link

More from NationalMore posts in National »

Be First to Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *